धनतेरस के दिन इन 10 चीज़ों को खरीदने से चमकता है भाग्य !

धन तेरस को सुख-समृद्धि, यश और वैभव का पर्व माना जाता है.

इस दिन धन के देवता कुबेर की पूजा का बड़ा महत्व होता है. स्कंद पुराण के मुताबिक इसी दिन आयुर्वेद के देवता धनवंतरी भी अमृत कलश के साथ समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन धनवंतरी जयंती भी मनाई जाती है.

कहा जाता है कि इसी दिन यमराज से राजा हिम के पुत्र की रक्षा उसकी पत्नी ने की थी. यही वजह है कि धनतेरस की शाम यमदेव के निमित्त दीप दान किया जाता है. माना जाता है कि ऐसा करने से यमराज के कोप से पूरे परिवार की रक्षा होती है.

मान्यता है कि धनतेरस के दिन बाजार से कुछ चीज़ों को खरीदकर घर लाने से इंसान का भाग्य 100 फीसदी चमक उठता है और उसका घर धन-धान्य और सुख-समृद्धि से भर जाता है.

1- लक्ष्मी गणेश की मूर्ति

धनतेरस के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की मूर्ति को खरीदकर घर लाना न भूलें. गणेश और लक्ष्मी की मूर्ति को धनतेरस के दिन घर लाने से घर में धन-संपत्ति का आगमन होता है जिससे पूरे साल भर घर में धन की कमी नहीं होती है !

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2- सोना-चांदी और धातु

धनतेरस के दिन सोना-चांदी या फिर धातु से बनी चीज़ें खरीदने से व्यक्ति के भाग्य में बढ़ोत्तरी होती है. धातु से बने समान और सोने-चांदी के गहने खरीदने के लिए धनतेरस का दिन सबसे बेहतर माना जाता है. इस दिन धातु का सामान लाने से घर में सदैव लक्ष्मी का वास बना रहता है.

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3- स्फटिक का श्रीयंत्र

स्फटिक का श्रीयंत्र घर लाने से माता लक्ष्मी घर की ओर आकर्षित होती हैं, इसलिए धनतेरस के दिन श्रीयंत्र को घर लाएं और दीवाली के दिन लक्ष्मी पूजन के साथ इस यंत्र की पूजा करें. पूजा के बाद इस यंत्र को केसरिया कपडे में बांधकर तिजोरी में रख दें. वहां हमेशा बरकत बनी रहेगी.

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4- झाडू खरीदें

झाडू को लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. धनतेरस के दिन नए झाडू को घर लाएं और दीवाली के दिन इस झाड़ू की पूजा भी करें. ऐसा करने से नकारात्मक शक्तियां घर से बाहर जाएंगी और साफ-सुथरे घर में लक्ष्मी का आगमन होगा.

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5- कौड़ी

कहा जाता है कि जिस घर में कौड़ी होती है उस घर में कभी भी धन का अभाव नहीं होता है. इसलिए धनतेरस के दिन कौड़ी खरीदकर घर लाएं और लक्ष्मी पूजा के समय इसे भी शामिल करें. पूजा के बाद इन कौडियों को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या धन स्थान पर रख दें.

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6- शंख

शंख सुख-समृद्धि और शांति का प्रतीक है. धन तेरस के दिन शंख को घर लाएं और इसे दीपावली पूजन के समय बजाएं, इससे लक्ष्मी का आगमन होगा और घर से अनिष्ट दूर हो जाएंगे.

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7- नमक

धन तेरस के दिन नमक के पैकेट को घर लाएं. इसे दीपावली के दिन इस्तेमाल भी करें. कहते हैं कि इस दिन नमक खरीदकर लाने से साल भर धन का अभाव नहीं होता है. दीपावली के दिन इसी नमक के पानी से घर में पोछा लगाने से दरिद्रता दूर होती है.

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8- धनिया

धनिया धन का प्रतीक है, इसलिए इस धनतेरस के दिन साबुत धनिया खरीदकर लाएं और दीपावली के दिन लक्ष्मीपूजन के समय इसकी भी पूजा करें. पूजन के बाद इसे घर के आंगन या गमले में रख दें.

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9- कुबेर की मूर्ति

धन तेरस के दिन धन के देवता कुबेर की पूजा का खास महत्व होता है इसलिए इस दिन कुबेर की मूर्ति या तस्वीर लाकर उनकी पूजा करें और पूजा करने के बाद उनकी मूर्ति को तिजोरी में स्थापित कर दें.

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10- गोमती चक्र

धनतेरस के दिन गोमती चक्र को खरीदकर घर अवश्य लाएं. धनतेरस के दिन गोमती चक्र का बहुत महत्व होता है. गोमती चक्र की पूजा करने बाद इसे तिजोरी में रख दें या फिर इसे खुद धारण करें.

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अगर आप माता लक्ष्मी की कृपा से अपने भाग्य को 100 फीसदी प्रबल बनाना चाहते हैं तो धन तेरस के शुभ मुहुर्त में इन 10 चीजों को खरीद कर घर लाना न भूलें.

दिवाली के त्यौहार में धन बरसेगा अगर 30 अक्टूबर पहले आप ये एक टोटका आजमा ले !

भगवान विष्णु का सबसे प्रिय और पवित्र कार्तिक मास चल रहा है.

इसी के साथ दिवाली की तैयारियां भी जोरों पर है जब माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाएगी.

अगर आप माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु दोनों की खास कृपा पाना चाहते हैं, तो आपको यह खास उपाय 30 अक्टूबर से पहले कर लेना चाहिए. इस उपाय को करने से आप पर माता लक्ष्मी की विशेष कृपा होगी और आपको कभी धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा.

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30 अक्टूबर से पहले इस उपाय को आज़माएं

देवी लक्ष्मी को शंख बहुत प्रिय है चूंकि वे स्वयं समुद्र से प्रकट हुई थीं और शंख की उत्पत्ति भी समुद्र से ही हुई है. इसलिए उनके पूजन में शंख का उपयोग किया जाता है.

वैसे शंखों के अनेक प्रकार होते हैं लेकिन मुख्यत उन्हें तीन भागों में बांटा गया है वामावर्ती, दक्षिणावर्ती और मध्यावर्ती.

इसमें दक्षिणावर्ती शंख चमत्कारिक माना जाता है. शुद्ध दक्षिणावर्ती शंख को सही विधि से दुकान, ऑफिस, उद्योग, कारखाना और घर के पूजन स्थल में स्थापित किया जाए तो उसके शुभ प्रभाव मिलते हैं और उस स्थान पर मां लक्ष्मी का वास होता है.

अगर आप धन की देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा पाना चाहते हैं तो दिवाली से पहले यानि 30 अक्टूबर से पहले उनके पसंदीदा दक्षिणावर्ती शंख को अपने घर ज़रूर ले आएं.

दक्षिणावर्ती शंख के चमत्कारिक लाभ

शंख को घर में स्थापित करने से वास्तुदोष समाप्त होते हैं. जिस घर में शंखनाद और शंख पूजन होता है वहां लक्ष्मी स्थायी रुप से निवास करती हैं.

दक्षिणावर्ती शंख की पूजा करने से घर में खुशहाली आती है और लक्ष्मी प्राप्ति के साथ-साथ संपत्ति भी बढ़ती है. इस मंगलचिन्ह को घर के पूजा स्थल पर रखने से अरिष्टों और अनिष्टों का भी नाश होता है.

ज्योतिष के अनुसार अगर इस शंख में शुद्ध जल, गाय का दूध या गंगा जल आदि भरकर घर में छिड़काव किया जाए तो उस स्थान की नकारात्मकता दूर होती है.

दक्षिणावर्ती शंख के बारे में कहा जाता है कि असफलता, शोक, गरीबी, व्यापार में नुकसान जैसी बाधाएं इस शंख के निकट नहीं आती. इतना ही नहीं इस शंख से जिस व्यक्ति के जीवन में कष्ट आते हैं उनका शीघ्र निवारण हो जाता है.

अगर दक्षिणावर्ती शंख को तिजोरी अथवा दुकान के गल्ले में रखा जाए और उसे नित्य धूप-दीप दिखाया जाए, तो वहां शंख का सकारात्मक प्रभाव बना रहता है इससे दरिद्रता का नाश होता है.

शंख से निकलने वाली ध्वनि जहां तक जाती है वहां तक बीमारियों के कीटाणुओं का नाश हो जाता है. खांसी, दमा, पीलिया, ब्लड प्रेशर या दिल से संबंधित बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए हर रोज़ शंख बजाएं. शंख में रखे पानी का सेवन करने से हड्डियां मज़बूत होती हैं.

शंख सिर्फ मां लक्ष्मी को ही नहीं बल्कि भगवान विष्णु को भी विशेष प्रिय है इसलिए वे अपने हाथों में शस्त्रों के साथ शंख भी धारण करते हैं.

अगर आप किसी भी तरह की आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं तो एक बार इस दक्षिणावर्ती शंख को अपने घर के मंदिर या तिजोरी में स्थापित करके देखें. यकीनन आपकी पैसों से संबंधित परेशानी दूर होगी और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा भी प्राप्त होगी.

नवरात्रि को सही रूप में कैसे मनाएं? | What to do during Navratri

नवरात्रि का अर्थ है ‘नौ रातें’| रात्रि विश्राम का समय होता है| यह मन और शरीर में पुनः ऊर्जा भरने का समय होता है|

#1 अपने मन और शरीर को विश्राम दें

नवरात्रि आपकी आत्मा के विश्राम का समय है| यह वह समय है जिसमें आप खुद को सभी क्रियाओं से अलग कर लेते हैं (जैसे खाना, बोलना, देखना, छूना, सुनना और सूंघना) और खुद में ही विश्राम करते हैं| जब आप इन्द्रियों की इन सभी क्रियाओं से अलग हो जाते हैं तब आप अंतर्मुखी होते हैं और यही वास्तविक रूप में आनंद, सुख और उत्साह का स्त्रोत है|

हममें से बहुत से लोग इसका अनुभव नहीं कर पाते क्योंकि हम निरंतर किसी न किसी काम में उलझे रहते हैं| हमारा मन हर समय व्यस्त रहता है| नवरात्रि वह समय है, जब हम खुद को अपने मन से अलग कर लेते हैं और अपनी आत्मा में विश्राम करते हैं| यही वह समय है जब हम अपनी आत्मा को महसूस कर सकते हैं|

#2 याद करिए कि आपका मूल क्या है

नवरात्रि वह मौका है जब आप इस स्थूल भौतिक संसार से सूक्ष्म आध्यात्मिक संसार की यात्रा कर सकते हैं| सरल शब्दों में – अपने रोज़ाना के कार्यों में से थोड़ा समय निकालिए और अपने ऊपर ध्यान ले जाईये| अपने मूल के बारे में सोचिये, आप कौन हैं और कहाँ से आये हैं| अपने भीतर जाईये और ईश्वर के प्रेम को याद करके विश्राम करिए|

#3 श्रद्धा रखिये

हम इस ब्रह्माण्ड से जुड़े हुए हैं, उस परम शक्ति से जुड़े हुए हैं जो इस पूरी सृष्टि को चला रही है| यह शक्ति प्रेम से परिपूर्ण है| यह पूरी सृष्टि प्रेम से परिपूर्ण है| नवरात्रि वह समय है, जिसमें आप याद करते हैं कि उस परम शक्ति को आप बहुत प्रिय हैं! प्रेम की इस भावना में विश्राम करिए| ऐसा करने पर आप पहले से अधिक तरोताज़ा, मज़बूत, ज्ञानी और उत्साहित महसूस करते हैं|

यदि आप आध्यात्मिक संसार की यात्रा करना चाहते हैं तो उसका मार्ग है – मौन, उपवास, जाप और ध्यान|

नवरात्री एवं व्रत (उपवास) के व्यंजन – Navratri Vrat or Upwas Recipe

  1. खांडवी | Khandvi
  2. उपवासी जीरा चावल | Fasting jeera rice
  3. दही करी (कढ़ी) | Yogurt Kadhi