ये हैं बॉलीवुड की 5 फिल्में जिनमें भारत-पाक की टेंशन के बीच दिखी बेपनाह मोहब्बत

भारत और पड़ोसी देश पाकिस्तान के रिश्तों के बीच इन दिनों काफी कड़वाहट देखने को मिल रही है.

हालांकि भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर आधारित कई फिल्में भी बॉलीवुड में बन चुकी है. इन दोनों देशों के बीच भले ही माहौल कितना भी तनावपूर्ण क्यों न हो लेकिन फिल्मों में अक्सर दोनों देशों के बीच हिन्दू मुस्लिम प्रेम कहानी को दिखाने की कोशिश की जाती रही है.

आज हम आपको बताने जा रहे हैं भारत-पाकिस्तान के संबंधों पर आधारित ऐसी ही 5 फिल्मों के बारे में, जिनमें दोनों देशों की दुश्मनी के बीच हिन्दू मुस्लिम प्रेम कहानी को बड़ी ही खूबसूरती से पेश किया गया है.

1- पीके

आमिर खान की फिल्म ‘पीके’ में एक ओर जहां आमिर एक एलियंस का किरदार निभाते नज़र आए तो वहीं अनुष्का शर्मा और सुशांत सिंह राजपूत के बीच लव स्टोरी को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है.

इस फिल्म में सरफराज का किरदार निभानेवाले सुशांत सिंह राजपूत ने एक पाकिस्तानी लड़के का किरदार निभाया है तो वहीं अनुष्का ने एक हिंदुस्तानी लड़की की भूमिका अदा की है.

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2- एक था टाइगर

फिल्म ‘एक था टाइगर’ में भारत-पाक के दुश्मन एजेंसियों के टाइगर और जोया के बीच प्रेम कहानी को पर्दे पर दिखाया गया है. इस फिल्म में टाइगर बने सलमान और जोया बनी कैटरीना कैफ की दोनों देश मिलकर तलाश करते हैं.

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3 – वीर जारा

फिल्म ‘वीर जारा’ में हिंदू एयरफोर्स पायलट वीर बने शाहरुख खान को पाकिस्तानी चुलबुली लड़की जारा का किरदार निभानेवाली प्रीति जिंटा से प्यार हो जाता है.

इस प्रेम कहानी में सरहद की दीवार बीच में आ जाती है और 22 साल पाकिस्तान की जेल में रहने के बाद वीर का मिलन जारा से हो पाता है.

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4 – गदर, एक प्रेम कथा

सन 1947 के भारत-पाक बंटवारे पर आधारित फिल्म ‘गदर-एक प्रेम कथा’ में तारा सिंह बने सनी देओल को सकीना बनी अमीषा पटेल से प्यार हो जाता है.

दोनों एक-दूसरे से शादी भी कर लेते हैं लेकिन शादी के बाद दोनों को सकीना के पिता अलग करने की काफी कोशिश करते हैं. पर आखिर में जीत दोनों के प्यार की ही होती है.

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5 – हिना

फिल्म ‘हिना’ में ऋषि कपूर श्रीनगर में हादसे का शिकार हो जाते हैं और पाकिस्तान पहुंच जाते हैं, जहां उनकी याददाश्त चली जाती है और उन्हें पाकिस्तानी लड़की हिना यानी जेबा बख्तियार से प्यार हो जाता है.

लेकिन इस कहानी में सियासी मोड़ आ जाता है. आखिर में हिना की मौत हो जाती है और दोनों की ये प्रेम कहानी सफल नहीं हो पाती है.

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गौरतलब है कि इन पांच फिल्मों के अलावा भी बॉलीवुड की कई और ऐसी फिल्में हैं जिनमें भारत-पाकिस्तान के रिश्तों की कड़वाहट के साथ ही दोनों देशों के बीच हिन्दू मुस्लिम प्रेम कहानी को दिखाने की कोशिश की गई है.

 

ये सेक्युलर मीडिया जब चाहे तब अँधा क्यों हो जाता है !

पश्चिम बंगाल में मुहर्रम के बाद हिंदुओ पर हो रहे सुनियोजित हमलो को लेकर जिस प्रकार सेक्युलर मीडिया ने खामोशी की चादर ओढ़ रखी है वह कई सवाल पैदा करता है.

अखलाक और कन्हैया को लेकर स्क्रीन काली करने वाला और असहिष्णुता का रोना रोने वाला मीडिया जिस प्रकार पश्चिम बंगाल की घटनाओं को पी रहा है क्या वह उस वक्त का इंतजार कर रहा है जब हिंदुओं की ओर से कोई जवाबी हमला और उस वक्त वह अल्पसंख्यकों पर हमले की खबर बनाकर हिंदुओं को कठघरे में खड़ा करे.

क्या देश की मुख्यधारा का मीडिया केवल तभी खबर बनाएगा जब कोई अखलाक मारा जाएगा. उस वक्त पूरा मीडिया दौड़ कर वहां जाकर जख्मों की पड़ताल करेगा. पश्चिम बंगाल में हजारों हिंदुओं के घर जला दिए गए, घरों में लूटपाट हुई और उनको गोली मारी गई इसको लेकर मीडिया में कोई हलचल नही होना संदेह पैदा करता है.

राज्य के हाजीनगर से हिंदुओं पर हमले के जो वीडियो सामने आ रहे हैं उसमे साफ दिखाई पड़ रहा है कि कुछ जिहादी मिलकर हिंदुओं पर हमले कर रहे है और लोगों के घरों को जला रहे हैं. खुलेआम पाकिस्तानी झंडे फेहरा रहे हैं और महिलाओं को निशाना बना रहे हैं. लेकिन सेक्युलर राष्ट्रीय मीडिया हिंदुओं पर हमले दिखाना नहीं चाहता है.

दरअसल, ममता बनर्जी सरकार ने मुस्लिमों के दवाब में इस वर्ष दुर्गा पूजा पर प्रतिबन्ध लगा दिया था. क्योंकि मोहर्रम और दुर्गा पूजा साथ साथ पड़ रहे थे. इसलिए मुहर्रम के रास्ते में पड़ने वाले सभी दुर्गा पूजा के पंडालों को हटा दिया गया या उनको काले कपड़े से ढ़क दिया गया.

जिसके विरोध स्थानीय हिंदू समाज उच्च न्यायालय की शरण में गए. न्यायालय ने सरकार द्वारा मुहर्रम के नाम पर दुर्गा पूजा रोके जाने को गलत ठहराते हुए सरकार के निर्णय को गैरकानूनी ठहरा दिया.

बताया जाता है इसके बाद मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा भड़काए गए जेहादियों ने मुस्लिम बहुल क्षेत्रो में जहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं वहां हिंसा का अभूतपूर्व तांडव किया.

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हाजीनगर की तरह हावड़ा जिले में मुहर्रम के समय पर बस में बैठी हिन्दू महिलाओं के साथ दुव्र्यहार कर उनके कपड़े फाड़े गए. मुर्शिदाबाद में ताजिया के दौरान उग्र मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओ की दर्जनों दुकानों में लूटपाट कर आगजनी की.

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उत्तरी 24 परगना, मेदनीपुर और मालदा सहित कई स्थानों पर जिस प्रकार मुहर्रम के दौरान और बाद में हिंदुओं पर हमले किए गए हैं उसको लेकर मीडिया शांत हैं.

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इतने बड़े पैमाने पर हिंदुओं पर हमले जिनकी मीडिया में खबर न बनाना दर्शाता है कि उसमें वह साहस ही नहीं बचा जो सच का सामना कर सके.

स्वयं को सेक्युलर कहलाने वाला मीडिया जिस प्रकार बंगाल में दंगों की रिर्पोटिंग को दबा रहा है उसको क्या कहा जाए. कल जब लोग मीडिया से इसको लेकर सवाल करेंगे और उसको बुरा भला कहेंगे, तो सबसे ज्यादा परेशानी इसी सेक्युलर मीडिया को होगी.

अगर ऐसे ही चलता रहा तो मीडिया अपनी सार्थकता और विश्वसनीयता खो बैठेगा.